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लेख
अकेले रह जाना ही बेहतर है || नीम लड्डू
Author Acharya Prashant
आचार्य प्रशांत
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अकेले रह जाना कहीं अच्छा है साँप-बिच्छुओं के साथ रह जाने से, है न? भूखे रह जाना कहीं अच्छा है ज़हर पी जाने से। प्रतीक्षा कर लो, इंतज़ार कर लो, प्रतीक्षा में भी परमात्मा होता है। जब तुम कहते हो, ‘कोई मिला नहीं ऐसा जो तेरी तरफ़ ला सके इसलिए हम अकेले बैठे हैं प्रतीक्षारत’, तो यह भी बड़े प्रेम की बात होती है, यह भी एक साधना ही होती है कि सही दिशा को आने वाली गाड़ी नहीं मिली तो हमने यह नहीं किया कि ग़लत दिशा की गाड़ी में सवार हो गए। हमने प्रतीक्षा कर ली या हम पैदल चल लिए, वह हमें क़बूल था; पर ग़लत दिशा की गाड़ी में बैठ जाना क़बूल नहीं था।

सही साथी नहीं मिला तो हमने तेरा साथ कर लिया, पर हमने यह नहीं करा कि किसी ऐसे को साथ ले लें जो हमारा बोझ ही बन जाए! गाड़ी की संगत की जाती है ताकि गाड़ी तुम्हें मंज़िल पर पहुँचा दे और कोई तुम्हें ऐसी गाड़ी ला कर दे जिसे तुम ही धक्का मार रहे हो तो ऐसी गाड़ी से तो कहीं बेहतर है पैदल चलना न?

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