Acharya Prashant is dedicated to building a brighter future for you
Articles
घटिया फ़िल्में देखने वालों || नीम लड्डू
Author Acharya Prashant
Acharya Prashant
1 min
51 reads

एक-से-एक पिक्चरें रिलीज़ होती हैं; दो-सौ, चार-सौ, छः-सौ करोड़ जा रही हैं, वो तुम्हारी जेब से ही तो जा रहा है। वो छः-सौ करोड़ का बिज़नेस कैसे किया पिक्चर ने? पिक्चरें जो इतना पैसा बनाती हैं उनको देखने फोर्ब्स पाँच-सौ वाले तो आते नहीं, या आते हैं? रेस चार, गोलमाल छः और घपला आठ, कमांडो पौने बारह, ये सब जो पिक्चरें रिलीज़ हो रही हैं, और चार-सौ करोड़ बटोर रही हैं, ये मध्यम वर्ग ही तो खर्च कर रहा है न। ईमानदारी से बताना, या अंबानी अदानी आते हैं इनको देखने सिनेमा हॉल में छः-सौ का टिकट ले कर? वो तो आते नहीं। ये जो पिक्चरें इतना पैसा बनाती हैं, किसकी जेब से जा रहा है? तुम्हारी जेब से आ रहा है। घटिया पिक्चर का जो टिकट खरीदते हो, जानते हो न उसी टिकट के पैसे से दुनिया में घटियापन और बढ़ता है? जब तुम एक घटिया पिक्चर को चार-सौ करोड़ का बिज़नेस दे देते हो, तो क्या नतीजा निकलेगा? वैसी पिक्चरें और बनेंगी और जिन घटिया लोगों ने वो पिक्चरें बनायी थीं उन्हें प्रोत्साहन मिल रहा है।

Have you benefited from Acharya Prashant's teachings?
Only through your contribution will this mission move forward.
Donate to spread the light
View All Articles